दालचीनी की खेती: कैसे, फायदे, पौधा सुरक्षा तथा उपयोग, यहां जानें।

क्या आप जानते है दालचीनी एक छोटा सदाबहार पेड़ है, जो कि 10–15 मी (32.8–49.2 फीट) ऊंचा होता है। यह श्रीलंका एवं दक्षिण भारत में बहुतायत में मिलता है। इसकी छाल मसाले की तरह प्रयोग होती है। इसकी अलग ही सुगन्ध होती है, जो कि इसे गरम मसालों की श्रेणी में रखती है। दालचीनी भूरे रंग की सुगंध से भरपूर मुलायम, और चिकनी होती है, जो भोजन में एक स्वाद जोड़ने के साथ विकार, दांत, सिरदर्द, चर्म रोग, भूख न लगने और मासिक धर्म से जुड़ी परेशानियों में राहत देने का काम करती है।

कुछ महत्वपूर्ण दालचीनी बारे में

  1. यह श्रीलंका एवम दक्षिण भारत मे बहुतायत से मिलता है।
  2. यह एक छोटा सदाबहार पेेड़ है जो 10-15 मीटर ऊंचा होता है।
  3. इसकी छाल से मसाला बनाया जाता है।
  4. पत्तियों के तेल से मच्छर भगाया जाता है।
  5. रसोई घर मे सब्जी को स्वादिष्ट बनाने में उपयोग किया जाता है।

दालचीनी प्रयोग

दालचीनी की छाल एक मसाले के रूप में व्यापक रूप से प्रयोग किया जाता है। यह मुख्यतः एक मसाला और स्वादिष्ट बनाने का मसाला सामग्री के रूप में रसोई में कार्यरत हैं। यह चॉकलेट की तैयारी में प्रयोग किया जाता है, विशेष रूप से मेक्सिको, जो सच दालचीनी के मुख्य आयातक है। यह भी सेब पाई, डोनट्स और दालचीनी बन्स के रूप में के रूप में अच्छी तरह मसालेदार कैंडी के रूप में कई डेसर्ट व्यंजनों, में प्रयोग किया जाता है, चाय, गर्म कोको और liqueurs. कैसिया बजाय सच दालचीनी, मीठा व्यंजन में उपयोग के लिए अधिक उपयुक्त है।

  • छाल का चूर्ण- 1 से 3 ग्राम
  • पत्तों का चूर्ण- 1 से 3 ग्राम
  • तेल-  2 से 5 बूंद

पौध सुरक्षा, रोग एवं रोकथाम

पर्ण चित्ती एवं डाई बैंकपर्ण चित्ती एवं डाई बैक रोग कोलीटोत्राकम ग्लोयोस्पोरियिड्स नामक किट द्वारा होता है।
बीजू अगंमारीयह रोग डिपलोडिया स्पीसीस नामक किट द्वारा पौधों में पौधशाला के अंदर होता है।
भूरी अगंमारीयह रोग पिस्टालोटिया पालमरम नामक किट द्वारा होता हैं।
कीट दालचीनी तितलीयह नए पौधों तथा पौधा शाला का प्रमुख कीट है तथा यह साधारणत: मानसून काल के बाद दिखयी देता है। बचाव हेतु लक्षण दिखने पर दवा का छिड़काव करना चाहिए।
लीफ माइनरयह मानसून काल में पौधशाला के अंदर पौधों कोसर्वाधिक हानि पहुँचाने वाला कीट है।
रोकथामरोकथाम हेतु नई पत्तों के निकलने पर 0.05% क्वनालफोस का छिड़काव करना प्रभावकारी होता है।

दालचीनी के फायदे

  • यह न केवल स्वाद को बढाने के काम आता है बल्कि इससे कई सेहतबर्धक उत्पादों को बनाया जाता है। इसका प्रयोग न केवल भारत मे बल्कि विदेशों में भी मसालेदार कैंडी बनाने के लिए होता है। दालचीनी का पूरा पौधा ही औषधिय गुणों से भरा हुआ है। दालचीनी पत्ती के तेल के लिए मच्छर के लार्वा को मारने में बहुत प्रभावी होना पाया गया है।
  • शहद और दालचीनी के मिश्रण में मानव शरीर के अनेकों रोगों का निवारण करने की अद्भुत शक्ति है। दुनियां के करीब सभी देशों में शहद पैदा होता है।
  • आज कल की सबसे बड़ी प्रॉब्लम गुप्त रोग बन चुकी है। ब्लाडर इन्फ़ेक्शन होने पर दो बडे चम्मच दालचीनी का पावडर और एक बडा चम्मच शहद मिलाकर गरम पानी केदेने से मूत्रपथ के रोगाणु नष्ट हो जाते हैं।
  • आज कल बुजुर्गों यहाँ तक कि बच्चों ने दर्द एक आम बात बन चुकी है जिन्हें जोड़ों के दर्द की समस्या हो, उन्हें हर दिन सुबह आधा चम्मच दालचीनी पाउडर को एक बड़े चम्मच शहद में मिला कर सेवन करने से बहुत जल्दी फायदा होता है।- दांत हमारे आकर्षण का मुख्य केंद्र होती है किंतु हम अपने खान पान पर ध्यान नही दे पाते है जिससे दांतों में कीड़े लग जाते है। दांत में कीड़ा लगने, या दर्द होने पर दालचीनी के तिेल में भीगी रूई का फाहा लगाने से आराम मिलता है।
  • बुजुर्गों को दालचीनी के तेल की कुछ बूंदें कान में डालने से कम सुनाई देने की समस्या से छुटकारा मिलता है।
  • दालचीनी से मुँह के बदबू को भी दूर किया जा सकता है और इससे मसूड़े भी मजबुत होते है।
  • कभी-कभी कंधे में दर्द होता है। दालचीनी का प्रयोग करने से कंधे का दर्द ठीक हो जाता है।

खेत की तैयारी

  • भूमि को अच्छे से साफ करके 50 सेंटीमीटर लंबाई और चौड़ाई के गड्ढे तैयार करें।
  • गड्ढों के बीच की दूरी 3 मीटर रखें।
  • पौधों को जून-जुलाई में लगाएं।
  • अगस्त-सितंबर में पौधों की गुड़ाई करें।

दालचीनी के उपयोगी भाग

दालचीनी का सेवन कई तरह से किया जा सकता है, जो ये हैंः-

  • पत्ते
  • छाल (Dalchini twak)
  • जड़
  • तेल 

दालचीनी खाने के क्या नुकसान है?

त्वचा को पंहुचा सकता है नुकसान दालचीनी की बात करें तो इसमें बर्निंग इफ़ेक्ट होता है,इसलिए इसके ज्यादा सेवन से आपको जलन की समस्या भी हो सकती है।

  • सांस लेने में परेशानी हो सकती है।
  • ब्लड शुगर अधिक मात्रा में कम हो जाता है।
  • लिवर की सेहत को हो सकता है नुकसान
  • होठों और मुँह में एलेर्जी को बढ़ाता है।

दालचीनी की किस्में

  • नवश्री (navshri)
  • नित्यश्री(nityashri)
  • सिनामोमम वर्म (Cinnamomum Verum)
  • सिनामोमम कैसिया (Cinnamomum Cassia)
  • सिनामोमम लौरेरी (Cinnamomum loureirii)

अक्सर पूछे जानें वाले प्रसन्न

दालचीनी के क्या क्या फायदे हैं?

पतंजलि के अनुसार, दालचीनी के सेवन से पाचनतंत्र संबंधी विकार, दांत, व सिर दर्द, चर्म रोग, मासिक धर्म की परेशानियां ठीक की जा सकती हैं। इसके साथ ही दस्त, और टीबी में भी इसके प्रयोग से लाभ मिलता है।

दालचीनी को कैसे सेवन करना चाहिए?

सुबह खाली पेट दालचीनी खाने से आपको पेट में जलन, ब्लोटिंग की समस्या और कब्ज में भी फायदा मिलता है। पेट में संक्रमण की समस्या में भी दालचीनी का सुबह खाली पेट सेवन बहुत फायदेमंद माना जाता है। आप दालचीनी का सेवन पाउडर, दालचीनी के पानी या दालचीनी की चाय के रूप में कर सकते हैं।

दालचीनी खाने के क्या नुकसान है?

त्वचा को पंहुचा सकता है नुकसान दालचीनी की बात करें तो इसमें बर्निंग इफ़ेक्ट होता है,इसलिए इसके ज्यादा सेवन से आपको जलन की समस्या भी हो सकती है।
>सांस लेने में परेशानी हो सकती है।
>ब्लड शुगर अधिक मात्रा में कम हो जाता है।
>लिवर की सेहत को हो सकता है नुकसान
>होठों और मुँह में एलेर्जी को बढ़ाता है।

दालचीनी और दूध पीने से क्या होता है?

अगर आप दूध में दालचीनी मिलाकर पीने के भी जबरदस्त फायदे हैं. पाचन तंत्र को दुरुस्त करने से लेकर नींद नहीं आने और ब्लड शुगर कंट्रोल करने से लेकर त्वचा पर निखार लाने में भी यह कारगर उपाय है. ऐसे में आइए जानते हैं कि कैसे दालचीनी औऱ दूध का मिश्रण आपकी सेहत के लिए है फायदेमंद।

दालचीनी की खेती कहाँ होती है?

दालचीनी दक्षिण भारत का एक प्रमुख वृक्ष है. इस वृक्ष की छाल का औषधि और मसालों के रूप में प्रयोग किया जाता है. दालचीनी (Cinnamon) एक छोटा सदाबहार पेड़ होता है, जो कि 10–15 मीटर ऊँचा होता है. ( cinnamon farming) दक्षिण भारत के केरल और तमिलनाडू में इसकी पैदावार की जाती है ।

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